IPL का शेर गिल एशिया कप से लेकर ऑस्ट्रेलिया श्रृंखला तक फेल, फिर भी उप-कप्तान।

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शुभमन गिल को लंबे समय से भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जाता रहा है। उनके खेल में शांति, नज़ाकत और सुंदर शॉट खेलने की क्षमता दिखाई देती है। आईपीएल में उन्होंने बड़े-बड़े रण बनाए, इसी कारण लोग उन्हें आईपीएल का शेर कहने लगे। लेकिन कहानी यहाँ उलट जाती है जब बात आती है अंतरराष्ट्रीय बीस-बीस प्रारूप की। asia cup से लेकर ऑस्ट्रेलिया श्रृंखला तक, शुभमन का बल्ला लगभग शांत रहा। बार-बार अवसर मिलने के बाद भी रण नहीं आ रहे। फिर भी टीम में उप-कप्तान का पद उनके पास है। तो जनता का प्रश्न बिल्कुल सीधा है: जब रण नहीं बन रहे, तो उप-कप्तान का दर्जा कैसे?

आईपीएल में शानदार प्रदर्शन का कारण।

आईपीएल में:

  • उन्हें अपनी पारी जमाने का समय मिलता है

  • गेंदबाज़ अधिकतर परिचित रहते हैं

  • मैदानों की स्थिति भी अंदाज़ में होती है

  • पारी की गति वह स्वयं तय करते हैं

यानी आईपीएल शुभमन की सुविधा वाला माहौल देता है।

20-20 अंतरराष्ट्रीय Matches में समस्या।

बीस-बीस प्रारूप में:

  • पहली ही गेंद से तेज़ खेलने का दबाव

  • हर मैदान, हर परिस्थिति बदलती

  • सामने अनुशासन से गेंद डालने वाले गेंदबाज़

यहाँ शुभमन की स्वाभाविक धीमी शुरुआत टीम पर बोझ बन जाती है। जब वह टिकने की सोचते हैं तो रण कम आते हैं, और जब तेजी दिखाने की कोशिश करते हैं तो विकेट चला जाता है। यानि: न तो जम पा रहे,और न ही खुलकर खेल पा रहे।

एशिया कप से ऑस्ट्रेलिया श्रृंखला तक गिरती लय।

इन सभी श्रृंखलाओं में:

  • रण कम

  • प्रहार की गति कमजोर

  • आत्मविश्वास डगमगाया

  • दबाव में गलत निर्णय

यह साफ दिखाता है कि: खिलाड़ी की लय टूट चुकी है और मानसिक बोझ बढ़ चुका है।

फिर भी उप-कप्तान कैसे?

टीम प्रबंधन शुभमन को:

  • शांत स्वभाव वाला खिलाड़ी

  • भविष्य में नेतृत्व करने वाला

  • टीम में सौहार्द बनाए रखने वाला

मानकर चलता है। लेकिन प्रारूप में वर्तमान प्रदर्शन ही मायने रखता है। नाम या भविष्य की कल्पना नहीं। यहीं से सवाल उठता है: क्या टीम प्रदर्शन से ऊपर व्यक्ति को रख रही है?

यशस्वी जायसवाल पर प्रभाव।

यशस्वी:

  • पहली गेंद से आक्रामक

  • गेंदबाज़ को दबाव में डालने वाला

  • पारी की गति बढ़ाने वाला

जब शुभमन लगातार खेलते हैं और रण नहीं आते:

  • यशस्वी के अवसर कम हो जाते हैं

  • उनका आत्मविश्वास भी प्रभावित होता है

  • उनकी स्वाभाविक खेल शैली रुक जाती है

यानि: एक खिलाड़ी की असफलता, दूसरे की प्रगति रोक सकती है।

संजू सैमसन पर और भी भारी असर।

संजू का हाल हमेशा से यह रहा है: “एक गलती और सीधे बाहर।”

उनमें:

  • प्रहार करने की क्षमता

  • मौके को मैच में बदलने का साहस

  • वर्तमान में बेहतर फॉर्म

तीनों मौजूद हैं।

लेकिन शुभमन का स्थान सुरक्षित दिखने के कारण:

  • संजू को अधिक दबाव में खेलना पड़ता है

  • हर पारी उनके करियर जैसी महसूस होती है

यानि: जिसे स्थिर स्थान चाहिए था, उसे संघर्ष मिल रहा है।

टीम संतुलन बिगड़ता हुआ।

जब शीर्ष क्रम धीमा चलता है:

  • मध्य क्रम पर भार बढ़ जाता है

  • अंतिम ओवरों में रण कम बनते हैं

  • गेंदबाज़ों को बचाव के लिए कम रण मिलते हैं

अंत में: पूरी टीम का मेल-जोल टूट जाता है।

आगे क्या होना चाहिए।

यदि आने वाली प्रतियोगिताओं में शुभमन लय नहीं पकड़ते, तो:

  • यशस्वी को स्थायी आरम्भकर्ता बनाना चाहिए

  • संजू को शीर्ष क्रम में स्थान देना चाहिए

  • उप-कप्तान का निर्णय पुनः विचार योग्य है

क्योंकि: स्थान क्षमता से मिलता है, पर स्थायित्व वर्तमान प्रदर्शन से।

निष्कर्ष।

शुभमन गिल में talent है, ये सब जानते हैं। लेकिन एशिया कप से ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ तक उनका लगातार खराब खेल ये दिखाता है कि दबाव में उनका खेल टूट रहा है। और इसका सीधा असर यशस्वी जायसवाल और संजू सैमसन के मौकों पर पड़ रहा है।

अब फैसला सिर्फ एक है: या तो गिल फॉर्म में लौटें, नहीं तो टीम को नयी दिशा चुननी पड़ेगी। क्रिकेट की दुनिया की हर एक इनसाइट पाने के लिए: अभी हमारी वेबसाइट पर जाएँ।

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