4 दिसंबर 2025 की तारीख और ashes 2025-2026 सीरीज़ का रोमांच अपने चरम पर है। ऑस्ट्रेलिया ने भले ही पहले टेस्ट में जीत हासिल कर ली हो, लेकिन अब दूसरा मुकाबला ब्रिस्बेन के मैदान पर एक नए ट्विस्ट के साथ आ रहा है: पैट कमिंस की वापसी!
इंग्लैंड 1-0 से पीछे है और उसे वापसी के लिए एक चमत्कार की ज़रूरत है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया अपनी टीम के सबसे बेहतरीन गेंदबाज़ और कप्तान के जुड़ने से अभेद्य लग रहा है। यह मैच सिर्फ स्कोरकार्ड का नहीं है, यह दोहरी वापसी की कहानी है-एक टीम को सीरीज़ में वापसी करनी है, और दूसरे को अपनी कप्तानी की बागडोर वापस संभालनी है।
Bazball पर दबाव: हार के बाद रणनीति में क्या बदलाव?
पहले टेस्ट में, इंग्लैंड की अति-आक्रामकता ने उन्हें निराश किया। जब टीम में जो रूट और ben stokes जैसे दिग्गज मौजूद हों, तब भी विकेट फेंकना Bazball की सबसे बड़ी कमज़ोरी को दर्शाता है। इंग्लैंड को अब अपने तेज़ रन बनाने के जुनून में ठहराव लाना होगा।
दूसरे टेस्ट में, इंग्लैंड की उम्मीदें टिकी हैं:
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कंसिस्टेंसी (Consistency): ओपनर्स को कम से कम नई गेंद का सामना करना होगा, ताकि मध्यक्रम पर दबाव न पड़े।
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मार्क वुड की ‘आग’: इंग्लैंड को तेज़ गति की सख्त ज़रूरत है। मार्क वुड की 150 Kmph की गति ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाजों को आउट करने का सबसे बड़ा मौका प्रदान करेगी। उनका मैदान पर होना ही प्रतिद्वंद्वी टीम पर मनोवैज्ञानिक दबाव डालता है।
ऑस्ट्रेलिया की महारत: कप्तान कमिंस का आगमन
ऑस्ट्रेलिया के लिए सबसे बड़ी खबर यह है कि टीम के नियमित कप्तान और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ तेज़ गेंदबाज़ों में से एक pat cummins दूसरे टेस्ट में वापसी कर रहे हैं। पहले टेस्ट में उनकी अनुपस्थिति के बावजूद ऑस्ट्रेलिया ने शानदार जीत दर्ज की, जो उनकी बेंच स्ट्रेंथ को दर्शाता है।
कमिंस फैक्टर क्यों गेम चेंजर है:
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नेतृत्व: कमिंस सिर्फ गेंदबाज़ नहीं, बल्कि एक शानदार कप्तान हैं। उनकी सटीक फील्ड प्लेसमेंट और धैर्य भरी रणनीति इंग्लैंड की आक्रामक Bazball रणनीति को बेअसर करने में अहम भूमिका निभाएगी।
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पिंक बॉल का बादशाह: कमिंस का गुलाबी गेंद से रिकॉर्ड शानदार रहा है। वह नई गेंद से स्विंग और पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग कराने की क्षमता रखते हैं। उनकी वापसी से ऑस्ट्रेलिया का तेज़ गेंदबाज़ी आक्रमण घातक बन जाएगा।
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दबाव में बल्लेबाज़ी: जरूरत पड़ने पर कमिंस निचले क्रम में बल्ले से भी उपयोगी योगदान देते हैं, जो इंग्लैंड की वापसी की उम्मीदों पर अंतिम प्रहार साबित हो सकता है।
इंग्लैंड की राह अब पहले से कहीं ज़्यादा मुश्किल हो गई है। उन्हें न सिर्फ मिचेल स्टार्क की स्विंग का सामना करना होगा, बल्कि अब पैट कमिंस की सटीक अनुशासन भरी गति का भी सामना करना पड़ेगा।
2-0 का इरादा: स्मिथ, लाबुशेन और स्टार्क का संयोजन
कमिंस की वापसी से, ऑस्ट्रेलिया का हर डिपार्टमेंट और भी मज़बूत हो गया है।
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बल्लेबाजी में अभेद्य: स्टीव स्मिथ और मार्नस लाबुशेन की जोड़ी दुनिया की सबसे मज़बूत मध्यक्रम की दीवार है। ये दोनों पिंक बॉल को बेहतरीन तरीके से खेलते हैं और इंग्लैंड के गेंदबाजों को लंबे समय तक विकेट से दूर रखने की क्षमता रखते हैं। ट्रेविस हेड अपनी आक्रामक पारी से इंग्लैंड के मनोबल को पहले ही तोड़ चुके हैं।
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स्टार्क का Pink Ball कहर: मिचेल स्टार्क गुलाबी गेंद के जादूगर हैं। कमिंस की वापसी के बाद स्टार्क को भी और अधिक आक्रामक होने की आज़ादी मिलेगी, क्योंकि उन्हें पता है कि उनका कप्तान भी दूसरे छोर से लगातार दबाव बनाए रखेगा।
ऑस्ट्रेलिया का लक्ष्य अब साफ है: इंग्लैंड की छोटी-सी गलती को भी बड़ी सज़ा देना और सीरीज़ को निर्णायक रूप से 2-0 पर ले जाना।
निष्कर्ष
4 दिसंबर 2025 को शुरू होने वाला यह दूसरा टेस्ट Bazball के लिए सबसे बड़ा इम्तिहान है। एक ओर इंग्लैंड है जो अपनी शैली को बदलने के लिए जूझ रहा है, तो दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया है जो अपने सबसे बड़े हथियार पैट कमिंस के साथ लौटकर अपनी ताक़त को दोगुना कर रहा है।
अगर इंग्लैंड को वापसी करनी है, तो उनके अनुभवी खिलाड़ियों (रूट, वुड) को अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। अन्यथा, कमिंस एंड कंपनी एशेज को एकतरफा बनाने की पूरी तैयारी में है।
तो, अब किसकी बारी? कमेंट में अपनी राय बताएं!
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