IPL का अखाड़ा: जहाँ दोस्ती टूटी, rivalry बनी।
कोहली और गंभीर के रिश्ते की शुरुआत सम्मान और बड़े भाई के स्नेह से हुई थी, लेकिन IPL ने इसे युद्ध में बदल दिया। यह कोई नया विवाद नहीं, बल्कि एक लंबी कहानी है।
IPL 2013 में सामने आई पहली सार्वजनिक घटना
IPL 2013 के RCB बनाम KKR मुकाबले में विराट कोहली के आउट होने के बाद मैदान पर तनावपूर्ण स्थिति बनी। दोनों खिलाड़ियों के बीच शब्दों का आदान-प्रदान हुआ और अंपायरों को हस्तक्षेप करना पड़ा।

IPL 2023 में दोबारा बढ़ा टकराव
लगभग एक दशक बाद, IPL 2023 में लखनऊ सुपर जायंट्स और RCB के मैच के बाद फिर से दोनों आमने-सामने आए। उस समय गौतम गंभीर LSG के मेंटर थे। मैच समाप्त होने के बाद हुई बहस को कैमरों ने रिकॉर्ड किया।
कोच की कुर्सी और ‘नो-गारंटी’ फॉर्मूला।
अब यह झगड़ा निजी अखाड़े से निकलकर राष्ट्रीय मंच पर आ गया है। गौतम गंभीर भारतीय टीम के मुख्य कोच हैं और यहीं से असली ड्रामा शुरू होता है।
A. रोहित और कोहली के भविष्य पर सवाल।
रिपोर्ट्स के अनुसार, गंभीर ने कड़ा रुख अपनाया है। उनका मानना है कि टीम इंडिया में किसी भी खिलाड़ी, यहाँ तक कि विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दिग्गजों के लिए भी कोई ‘गारंटीड’ जगह नहीं है। अगले Cricket world cup 2027 को देखते हुए, गंभीर युवा और फिट खिलाड़ियों को मौका देने की बात कर रहे हैं। 37 वर्षीय कोहली के लिए यह किसी चेतावनी से कम नहीं है।
B. विचारधारा का संघर्ष।
गंभीर का कोचिंग स्टाइल पूरी तरह से ‘टीम फर्स्ट’ पर आधारित है। वह ड्रेसिंग रूम में ‘स्टार कल्चर’ को खत्म करने में विश्वास रखते हैं। इसके विपरीत, विराट कोहली खुद एक ग्लोबल ब्रांड हैं और उनका खेलना टीम को एक अलग आत्मविश्वास देता है।
- गंभीर की सोच: 11 खिलाड़ी मिलकर खेलते हैं, किसी एक खिलाड़ी का नाम टीम से बड़ा नहीं हो सकता।
- कोहली का पक्ष: मेरा अनुभव और फिटनेस अभी भी टीम के लिए ज़रूरी है।
इस विचारधारा के संघर्ष ने ही तनाव पैदा किया है। कोहली का कोच के फैसलों पर क्या रुख होगा, यह देखना बाकी है।

टीम इंडिया का भविष्य: सबसे बड़ा दांव।
यह व्यक्तिगत ईगो का मामला नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के उच्च प्रदर्शन का सवाल है। अगर ये दोनों दिग्गज एक साथ काम नहीं कर पाते हैं तो इसका सीधा असर टीम के प्रदर्शन और ड्रेसिंग रूम के माहौल पर पड़ेगा।
सुलझाने के तरीके
- BCCI का हस्तक्षेप: बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए और दोनों को बिठाकर एक स्पष्ट कार्य योजना तैयार करनी चाहिए, जहाँ टीम इंडिया ही प्राथमिकता हो।
- कप्तान की भूमिका: टीम के कप्तान को ड्रेसिंग रूम में इन दोनों के बीच एक पुल का काम करना होगा।
- प्रोफेशनल एटीट्यूड: कोहली और Gautam gambhir दोनों को समझना होगा कि वे अब सिर्फ एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि एक ही जहाज के मुसाफिर हैं। उन्हें निजी मतभेदों को पीछे छोड़कर, देश के लिए एक साथ, पूरी तरह से प्रोफेशनल तरीके से काम करना होगा।
निष्कर्ष।
सच्चाई यह है कि विराट कोहली और गौतम गंभीर दोनों ही भारतीय क्रिकेट के लिए सोना हैं। गंभीर एक सख्त, अनुशासन-प्रिय कोच हो सकते हैं, और कोहली एक भावनात्मक, ऊर्जावान खिलाड़ी। यह टकराव तब तक खत्म नहीं होगा जब तक दोनों यह स्वीकार नहीं कर लेते कि उनका लक्ष्य एक ही है आपको क्या लगता है – क्या कोहली और गंभीर की यह ‘लड़ाई’ कभी खत्म हो पाएगी? अपनी राय कमेंट सेक्शन में बताएं! ऐसे ही ब्लॉग्स पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट VirtualBoost.in/blog पर जाएँ।
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