अबू धाबी में जब गिरा हथौड़ा IPL 2026 का मिनी ऑक्शन हमेशा से ही अपनी अनिश्चितता के लिए जाना जाता है, लेकिन दिसंबर 2025 में अबू धाबी में हुए IPL 2026 के मिनी ऑक्शन ने तो सारी हदें पार कर दीं। एक तरफ जहाँ कैमरून ग्रीन ने ₹25.20 करोड़ का ऐतिहासिक आंकड़ा छुआ और अनकैप्ड खिलाड़ी प्रशांत वीर और कार्तिक शर्मा को ₹14.20 करोड़ मिले, वहीं ऑक्शन रूम में एक सन्नाटा तब छा गया जब कुछ ऐसे बड़े नामों को पुकारा गया जिनके बिना किसी टीम की कल्पना करना मुश्किल था।
1. डेवोन कॉनवे: CSK का वो भरोसेमंद स्तंभ जो ढह गया
सबसे बड़ा झटका न्यूज़ीलैंड के सलामी बल्लेबाज devon conway के रूप में लगा। चेन्नई सुपर किंग्स के लिए 1000 से ज्यादा रन बनाने वाले और कंसिस्टेंसी की मिसाल माने जाने वाले कॉनवे को ₹2 करोड़ के बेस प्राइस पर किसी ने नहीं खरीदा।
क्यों रहे अनसोल्ड? विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रेंचाइजी अब ऐसे ओपनर्स की तलाश में हैं जो पहली गेंद से ही 200 के स्ट्राइक रेट से खेलें। कॉनवे का ‘एंकर’ रोल शायद अब आधुनिक T20 के सांचे में फिट नहीं बैठ रहा था।
2. जेक फ्रेजर-मैकगर्क: ‘यंग गन’ की खामोशी
पिछली बार अपनी तूफानी बल्लेबाजी से सुर्खियां बटोरने वाले ऑस्ट्रेलिया के 23 वर्षीय जेक फ्रेजर-मैकगर्क का अनसोल्ड रहना सबसे बड़ी मिस्ट्री रही। अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए मशहूर इस खिलाड़ी में किसी टीम ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। शायद उनका ₹2 करोड़ का बेस प्राइस और हालिया अस्थिर फॉर्म टीमों को रिस्क लेने से रोक गया।

3. जॉनी बेयरस्टो: अनुभव की हार?
इंग्लैंड के विस्फोटक बल्लेबाज और IPL के पुराने धुरंधर jonny bairstow को भी इस बार कोई खरीदार नहीं मिला। बेयरस्टो का न बिकना यह संकेत देता है कि IPL अब ‘पास्ट परफॉरमेंस’ से ज्यादा ‘करंट फॉर्म’ और ‘फ्यूचर इन्वेस्टमेंट’ की ओर बढ़ चुका है।
4. स्पिन के जादूगर भी रहे बेअसर: मुजीब और थीक्षाना
अफ़ग़ानिस्तान के मुजीब उर रहमान और श्रीलंका के महेश थीक्षाना जैसे मिस्ट्री स्पिनर्स का अनसोल्ड रहना यह दर्शाता है कि टीमें अब विदेशी स्पिनर्स के बजाय घरेलू भारतीय प्रतिभाओं पर दांव खेलना ज्यादा सुरक्षित समझ रही हैं। थीक्षाना जैसे खिलाड़ी का ₹2 करोड़ के बेस प्राइस पर अनसोल्ड रहना वाकई चौंकाने वाला है।
5. जब ‘रिडेम्पशन’ ने दी दस्तक पृथ्वी शॉ और सरफराज खान
इस ऑक्शन की एक और खास बात रही पृथ्वी शॉ और सरफराज खान की कहानी। शुरुआत में दोनों ही ‘unsold’ रहे, जिससे फैंस काफी निराश थे। सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हो गईं कि क्या इन प्रतिभाओं का करियर खत्म हो गया है? लेकिन ‘एक्सेलेरेटेड राउंड’ में कहानी बदली।
- पृथ्वी शॉ: दिल्ली कैपिटल्स ने अंततः अपने पुराने खिलाड़ी को ₹75 लाख में वापस लिया।
- सरफराज खान: घरेलू क्रिकेट के किंग सरफराज को चेन्नई सुपर किंग्स ने धोनी की छत्रछाया में ₹75 लाख में मौका दिया।
IPL की बदलती सोच: आखिर बड़े नाम क्यों नहीं बिके?
इस ऑक्शन ने तीन मुख्य बातें साफ कर दी हैं:
- Uncapped over Experienced: टीमें अब ₹30 लाख वाले अनकैप्ड खिलाड़ियों को ₹14 करोड़ देने को तैयार हैं, क्योंकि वे लंबी रेस के घोड़े साबित हो सकते हैं।
- Role Specificity: अब सिर्फ ‘बड़ा नाम’ होना काफी नहीं है। अगर टीम को डेथ ओवर स्पेशलिस्ट चाहिए, तो वह टॉप ऑर्डर के बड़े बल्लेबाज को इग्नोर करने में हिचकिचा नहीं रही।
- Overseas Balance: विदेशी खिलाड़ियों के स्लॉट फिक्स होने की वजह से टीमें बहुत सोच-समझकर विदेशी स्लॉट भर रही हैं।
निष्कर्ष
बिल्कुल नहीं! IPL के इतिहास में कई बार ‘Replacement Player’ के तौर पर अनसोल्ड खिलाड़ियों ने आकर टूर्नामेंट जिताया है। चोटिल खिलाड़ियों की जगह इन दिग्गजों के लिए दरवाजे अभी भी खुले हैं। लेकिन 2026 का ऑक्शन हमेशा इस बात के लिए याद रखा जाएगा कि यहाँ नाम से ज्यादा ‘काम’ और ‘संभावनाओं’ की कीमत लगी।
आपकी क्या राय है? क्या डेवोन कॉनवे या जेक फ्रेजर-मैकगर्क को किसी टीम में होना चाहिए था? कमेंट में जरूर बताएं!
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